ध्रुवपद धरोहर में प्रख्यात गायकों ने बिखेरी स्वर लहरियां

    ध्रुवपद धरोहर में प्रख्यात गायकों ने बिखेरी स्वर लहरियां



राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में 29वें अखिल भारतीय ध्रुवपद नाद-निनाद-विरासत समारोह का आगाज


जयपुर। इंटरनेशनल ध्रुवपद धाम ट्रस्ट, जयपुर की ओर से आयोजित दो दिवसीय 29वें अखिल भारतीय ध्रुवपद नाद-निनाद-विरासत समारोह 'ध्रुवपद धरोहर' का बुधवार को आगाज हुआ। आरआईसी, उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, पटियाला की सहभागिता और कला संस्कृति साहित्य एवं पुरातत्व विभाग, राजस्थान सरकार के सहयोग से आयोजित समारोह में देश के प्रख्यात ध्रुवपद गायकों ने प्रसिद्ध संगतकारों के साथ ध्रुवपद गायन की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर ट्रस्ट की ओर से डॉ. सुमीत आनन्द पांडे को युवा नाद रत्न सम्मान, वरिष्ठ लेखक श्री अनुराग त्रिवेदी को पत्रकारिता में योगदान के लिए शब्द ब्रह्ममूर्ति सम्मान प्रदान किया गया। वहीं पद्मश्री पं. उमाकान्त गुंदेचा को नादब्रह्म मूर्ति सम्मान से नवाजा गया। पत्रिका ध्रुवपद वाणी के पोस्टर का विमोचन भी इस दौरान किया गया। 


*गणपति स्तोत्र के साथ शुरुआत...*

ध्रुवपदाचार्य पंडित लक्ष्मण भट्ट तैलंग एवं प्रोफ़ेसर डॉक्टर मधु भट्ट तैलंग के संयोजन में हो रहे इस समारोह की शुरुआत ट्रस्ट के 50 बच्चों द्वारा वैदिक गणपति स्तोत्र, गुरु वंदना एवं भाव भट्ट की ध्रुवपद स्तुति के सामूहिक गायन के बीच अतिथियों की ओर से दीप प्रज्ज्वलन कर की गयी। वैदिक मंत्रों से सभागार गूंजायमान हो उठा जिसने आध्यात्मिक चेतना जागृत की। पखावज पर श्री प्रतीश रावत ने सुंदर संगत की। इस दौरान विशिष्ट अतिथि पद्मश्री तिलक गीताई, प्रसिद्ध चित्रकार रामू राम देव, समारोह संयोजक प्रो. डॉ. मधु भट्ट तैलंग और सह संयोजक श्याम सुंदर शर्मा मौजूद रहे। 


*ध्रुवपद साधकों ने बिखेरी स्वर लहरियां...*  

कार्यक्रम में सबसे पहले दरभंगा घराने की ध्रुवपद परंपरा के साधक पं. डॉ. सुमित आनंद पांडे ने प्रस्तुति दी। सुमित आनंद ने राग मारवा में आलाप के साथ सुर साधे। इसके बाद चौताल में पद 'दमपति भूप भय रूप बिसात करी खेलन लाग्यो शतरंजबाजी' में लयकारियों के विविध सृजनात्मक लय बाँट व तिहाइयों के विविध  प्रयोगों को गाकर ख़ूब दाद बटोरी। राग यमन में धमार ताल में पद गायन के नोमतोम आलाप में गमक व  मींड का उम्दा प्रयोग कर उन्होंने प्रस्तुति को बढ़ाया एवं एक धमार 'लाल रंगीले खेले होरी, ब्रज की होरी... संग वृषभानु किशोरी उड़वत अबिर रोली' गाकर सभी को कृष्ण रंग में रंग दिया। पं. राधेश्याम शर्मा ने पखावज पर बेहतरीन संगत की व वर्षा विजय एवं खुशबू कुमावत ने तानपुरे पर संगत की। डॉ. सुमित ने अपने दादा धीरेन्द्र मोहन पांडे से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की है, दरभंगा घराने के अभय नारायण मलिक से उन्होंने आगे की संगीत शिक्षा हासिल की। सुमित देश—विदेश में ध्रुवपद गायन की प्रस्तुति दे चुके हैं। भोपाल के सुविख्यात ध्रुवपद गायक पद्मश्री पं. उमाकान्त गुंदेचा और आनंद गुंदेचा की ध्रुवपद-जुगलबंदी ने सभी को आध्यात्मिक शांति से सराबोर कर दिया। राग पटदीप में ललित्यपूर्ण आलाप के बाद उन्होंने बारह मात्रा चौताल में बंदिश 'जब करतार करम करे तो सब कछु पावै' पेश की। सूल ताल में छोटी बंदिश 'नाद परमब्रह्म अपरमपार' के साथ-साथ उन्होंने अन्य रचनाओं की प्रस्तुति के साथ सुमधुर स्वरलहरियां बिखेर कर श्रोताओं को अपने रंग में रंग दिया। पखावज पर पं. अखिलेश गुंदेचा ने गायनानुकूल बेहतरीन संगत की। 


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