जयपुर में ‘इंडिया टी वॉकाथॉन’ की सफलता के बाद सी. मुरुगन से खास बातचीत
जयपुर में ‘इंडिया टी वॉकाथॉन’ की सफलता के बाद सी. मुरुगन से खास बातचीत
जयपुर। पिंक सिटी में आयोजित इंडिया टी वॉकाथॉन की शानदार सफलता के बाद टी बोर्ड इंडिया के डिप्टी चेयरपर्सन सी. मुरुगन ने चाय की बदलती संस्कृति, युवाओं की भागीदारी और भविष्य की योजनाओं पर खुलकर अपनी बात रखी।उन्होंने बताया कि जयपुर में 500 से अधिक लोगों की भागीदारी अपेक्षा से कहीं ज्यादा रही। सुबह-सुबह लोगों का उत्साह यह दर्शाता है कि चाय अब सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि एक जीवनशैली बनती जा रही है।
ग्लोबल पहचान पर फोकस
उन्होंने कहा कि टी बोर्ड इंडिया का उद्देश्य केवल चाय उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय चाय की गुणवत्ता, विविधता और विरासत को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना है। छोटे किसानों से लेकर उपभोक्ताओं तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना उनकी प्राथमिकता है।
‘वेलनेस’ के साथ चाय का नया जुड़ाव
‘इंडिया टी: दी वेलनेस देट विन्स’ थीम पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय चाय में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और प्राकृतिक गुण इसे एक बेहतरीन वेलनेस ड्रिंक बनाते हैं, जिसे अब दुनिया फिर से अपनाने लगी है।
युवाओं से कनेक्ट करने की रणनीति
कॉफी और एनर्जी ड्रिंक्स की ओर झुकाव के सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि जुड़ाव जरूरी है। टी बोर्ड युवाओं तक पहुंचने के लिए कैंपस एक्टिवेशन, डिजिटल कैंपेन और एक्सपीरियेंशियल इवेंट्स पर काम कर रहा है।
रीजनल चाय की खास पहचान
उन्होंने बताया कि असम, दार्जिलिंग और नीलगिरी की चाय को अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी विशिष्ट पहचान के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है—GI टैगिंग, ट्रेड मिशन और अंतरराष्ट्रीय फेस्टिवल्स के जरिए।
छोटे चाय उत्पादकों पर विशेष ध्यान
देश के कुल उत्पादन में 52% से अधिक योगदान देने वाले छोटे चाय उत्पादकों के लिए वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और उचित मूल्य सुनिश्चित करने के प्रयास लगातार जारी हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म की बड़ी भूमिका
उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया बेहद अहम है। टी बोर्ड कंटेंट क्रिएटर्स और विशेषज्ञों के साथ मिलकर चाय की नई कहानियां पेश कर रहा है।
जयपुर क्यों बना शुरुआत का केंद्र
जयपुर को चुनने पर उन्होंने कहा कि यह शहर परंपरा और आधुनिकता का बेहतरीन संगम है, जहां चाय संस्कृति गहराई से जुड़ी हुई है।
आगे की योजना
उन्होंने बताया कि जयपुर सिर्फ शुरुआत है और अगले एक साल में देश के 10 से अधिक शहरों में ऐसे आयोजन किए जाएंगे।
करियर के नए अवसर
चाय उद्योग में युवाओं के लिए एग्री-टेक, टेस्टिंग, टी-टेस्टिंग, एक्सपोर्ट, डिजिटल मार्केटिंग और टी-टूरिज्म जैसे कई अवसर मौजूद हैं।
अंतिम संदेश
उन्होंने कहा कि हर चाय की चुस्की लाखों किसानों और भारत की समृद्ध परंपरा से जुड़ाव है। “चाय सिर्फ पेय नहीं, हमारी पहचान है — इसे गर्व से अपनाइए।”





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