फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवॉर्ड पर बवाल:
फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवॉर्ड पर बवाल:
फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार के आरोप
जयपुर। राज्य सरकार की ओर से नर्सिंग सेवाओं में उत्कृष्ट कार्य करने वाले नर्सिंगकर्मियों को दिए जाने वाले फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवॉर्ड इस बार विवादों में घिर गए हैं। नर्सिंग संगठनों ने सम्मान प्रक्रिया में अनियमितताओं, फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए सरकार और राजस्थान नर्सिंग काउंसिल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदेशभर से आए नर्सिंग प्रतिनिधियों ने जयपुर में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मुलाकात कर रजिस्ट्रार पर नियमों की अनदेखी, पक्षपात और निजी संस्थानों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए। संगठनों का कहना है कि जिन नर्सिंगकर्मियों ने वर्षों तक सरकारी सेवाओं में उत्कृष्ट कार्य किया, उनकी अनदेखी कर निजी संस्थानों से जुड़े लोगों को सम्मानित किया गया।
नर्सिंग नेताओं ने आरोप लगाया कि पुरस्कार के मूल प्रारूप में बदलाव कर सरकारी विभागों के नाम हटाए गए और निजी व्यक्तियों के हस्ताक्षर से अवॉर्ड वितरित किए गए। इससे पूरे सम्मान समारोह की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप यह भी है कि समारोह को सरकारी आयोजन की बजाय निजी कार्यक्रम का रूप दिया गया, जिसमें बाहरी लोगों की भीड़ जुटाकर अधिकारियों पर दबाव बनाया गया। नर्सिंग संगठनों ने यह भी दावा किया कि कार्यक्रम के नाम पर नर्सिंग काउंसिल के कोष का दुरुपयोग किया गया।
आक्रोशित नर्सिंग कर्मचारियों ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई, मामले की उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों को हटाने की मांग की है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
नर्सिंग महासंघ के पदाधिकारियों ने सरकार की “जीरो टॉलरेंस नीति” पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सामान्य कर्मचारियों पर तुरंत कार्रवाई हो सकती है तो इस मामले में भी समान सख्ती दिखाई जानी चाहिए। इस पूरे विवाद ने न केवल फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवॉर्ड की गरिमा पर प्रश्नचिह्न लगाया है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और नर्सिंग व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।






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