आदि कैलाश के दर्शन अद्भुत, अविश्वसनीय और अकल्पनीय : कैलाशी नंदकिशोर शर्मा

 आदि कैलाश के दर्शन अद्भुत, अविश्वसनीय और अकल्पनीय : कैलाशी नंदकिशोर शर्मा



जोलिंगकोंग (उत्तराखंड), 11 जून । आदि कैलाश एवं ओम पर्वत की धार्मिक यात्रा पर पहुंचे जयपुर के कैलाशी नंदकिशोर शर्मा ने कहा कि आदि कैलाश के दर्शन अद्भुत, अविश्वसनीय और अकल्पनीय हैं। उन्होंने इसे कैलाश मानसरोवर का दूसरा स्वरूप बताते हुए कहा कि जिन श्रद्धालुओं के पास समय या बजट की कमी होती है, वे आदि कैलाश को "मिनी कैलाश" मानकर दर्शन करते हैं। यात्रा का संचालन पिछले 25 वर्षों से हिमालयी क्षेत्रों में ट्रैकिंग एवं धार्मिक यात्राएं कराने वाले मोहन सिंह दानू तथा ग्रीन हिल ट्रेक के टीम लीडर तारा सिंह दानू के मार्गदर्शन में किया गया। यात्रा दल में कैलाशी नंदकिशोर शर्मा, अश्विनी गर्ग, धीरज गुप्ता, पारूल गुप्ता, सुजय सेठी, शिवांगी अग्रवाल, रमेश कोंडसकर, श्रेया कोंडसकर, अशोक पिल्लई, अश्विनी महाजन, विठ्ठल, शांभवी, सीमा तथा नंद कुमार कारभारी सहित अन्य श्रद्धालु शामिल रहे।


श्रद्धालुओं ने पैदल ट्रेकिंग करते हुए जयकारों के साथ आदि कैलाश, पार्वती सरोवर (पार्वती ताल) और गौरी कुंड के दर्शन किए। उन्होंने बताया कि आदि कैलाश को "छोटा कैलाश" अथवा "जोलिंगकोंग पीक" भी कहा जाता है। स्थानीय भोटिया समुदाय इसे "बाबा कैलाश" तथा नेपाल में "शिव कैलाश" के नाम से जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत युद्ध के बाद पांडव स्वर्गारोहण के मार्ग में यहां पहुंचे थे और शिव आराधना की थी। कुटी गांव का नाम माता कुंती से जुड़ा माना जाता है। महर्षि वेदव्यास की तपोस्थली भी यहीं स्थित है, जहां व्यास गुफा और व्यास मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं।


आदि कैलाश के नीचे स्थित पार्वती सरोवर का जल अत्यंत स्वच्छ है, जिसमें कैलाश पर्वत का प्रतिबिंब दिखाई देता है। लगभग 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित गौरी कुंड को माता पार्वती के स्नान स्थल के रूप में पूजा जाता है। बर्फ से आच्छादित पिरामिडनुमा आकार वाला आदि कैलाश पर्वत शिवलिंग की आकृति जैसा प्रतीत होता है। आसपास पंचाचूली, ब्रह्म पर्वत और शेषनाग पर्वत की बर्फीली चोटियां प्राकृतिक सौंदर्य को और आकर्षक बनाती हैं।


यात्रियों ने बताया कि धारचूला से इनर लाइन परमिट आवश्यक होता है। गुंजी तक सड़क मार्ग उपलब्ध है, जबकि आगे का रास्ता ट्रेकिंग द्वारा तय किया जाता है। मई-जून तथा सितंबर-अक्टूबर यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है।उन्होंने बताया कि लगभग 14 हजार फीट की ऊंचाई पर ऑक्सीजन का स्तर काफी कम हो जाता है, इसलिए यात्रियों को सावधानी बरतनी चाहिए। गुंजी के बाद मोबाइल नेटवर्क भी उपलब्ध नहीं रहता तथा रात्रि में तापमान शून्य से नीचे चला जाता है। 

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