शहीद स्मारक पर गुंडागर्दी का आरोप,

शहीद स्मारक पर गुंडागर्दी का आरोप,
पत्रकारों से मारपीट और महिला पत्रकारों से धक्का-मुक्की



जयपुर। राजधानी जयपुर के शहीद स्मारक पर धरना-प्रदर्शन के दौरान मीडिया कवरेज को लेकर विवाद खड़ा हो गया। प्रदर्शन की कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों ने कुछ प्रदर्शनकारियों पर अभद्रता, धक्का-मुक्की, गाली-गलौज और कवरेज में बाधा डालने के आरोप लगाए हैं। इस दौरान महिला पत्रकारों के साथ भी कथित तौर पर धक्का-मुक्की और दुर्व्यवहार किए जाने की बात सामने आई है।

बताया जा रहा है कि मीडिया टीम धरना-प्रदर्शन की कवरेज कर रही थी। इसी दौरान शहीद स्मारक परिसर में कुछ लोगों के शहीदों की स्मृति में स्थापित शिला पर जूते-चप्पल सहित खड़े होने का वीडियो बनाए जाने को लेकर विवाद शुरू हुआ। पत्रकारों द्वारा इस संबंध में सवाल किए जाने पर मौके पर मौजूद कुछ लोग कथित तौर पर आक्रोशित हो गए।



वीडियो बनाने को लेकर बढ़ा विवाद

मीडियाकर्मियों का आरोप है कि वीडियो रिकॉर्डिंग से नाराज लोगों ने पत्रकारों के साथ बहस शुरू कर दी और बाद में धक्का-मुक्की तथा बदसलूकी की गई। आरोप यह भी है कि पत्रकारों का माइक छीनने और कैमरे के सामने आकर कवरेज रोकने का प्रयास किया गया। मौके पर मौजूद भीड़ में कुछ लोगों द्वारा पत्रकारों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप है।

महिला पत्रकारों को घेरने का आरोप

घटना के दौरान महिला पत्रकारों के साथ भी कथित तौर पर दुर्व्यवहार और धक्का-मुक्की किए जाने की बात कही जा रही है। आरोप है कि कुछ लोगों ने महिला मीडियाकर्मियों को घेर लिया और उन्हें सवाल पूछने तथा घटना की रिकॉर्डिंग करने से रोकने का प्रयास किया। इससे मौके पर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बन गई।



‘गोदी मीडिया’ के नारे लगाने का आरोप

मीडियाकर्मियों का कहना है कि जब उन्होंने शहीद स्मारक की गरिमा और वहां मौजूद गतिविधियों को लेकर सवाल उठाए तो कुछ प्रदर्शनकारियों ने पत्रकारों को ‘गोदी मीडिया’ कहकर संबोधित किया। पत्रकारों का आरोप है कि सवालों का जवाब देने के बजाय भीड़ के कुछ लोगों ने आक्रामक रुख अपनाते हुए मीडिया कवरेज बाधित करने की कोशिश की।

आंदोलन के अधिकार के साथ मीडिया की स्वतंत्रता भी जरूरी

घटना ने धरना-प्रदर्शनों के दौरान मीडियाकर्मियों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्मारकों की गरिमा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध और अपनी मांगों को रखने का अधिकार प्रत्येक नागरिक को है, लेकिन इसी के साथ स्वतंत्र मीडिया को घटनाओं की निष्पक्ष कवरेज करने का अधिकार भी है। किसी भी पक्ष की ओर से पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार या हिंसक व्यवहार की शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

मीडियाकर्मियों ने प्रशासन से घटना के वीडियो और सीसीटीवी फुटेज की जांच कर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष पड़ताल करने तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। साथ ही धरना-प्रदर्शन स्थलों पर, विशेषकर महिला पत्रकारों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई है।

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