कहीं कान्हा बनकर थिरके बच्चे, कहीं राधा रानी की अदाओं ने जीता दिल
कहीं कान्हा बनकर थिरके बच्चे, कहीं राधा रानी की अदाओं ने जीता दिल; सेल्फी और वीडियो में कैद हुई कृष्ण भक्ति की प्यारी तस्वीरें
मटकी-माखन, मुरली की तान और नन्हे कदमों का नृत्य… नंद उत्सव में हर आंगन बना वृंदावन
जयपुर। “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की…” के जयघोष से जन्माष्टमी के बाद शनिवार को नंद उत्सव का रंग और भी गहरा नजर आया। घरों से लेकर मंदिरों, मोहल्लों और गांवों की चौपालों तक हर तरफ कान्हा की बाल लीलाओं की झलक दिखाई दी। कहीं नन्हे कदम कृष्ण भजनों पर थिरकते नजर आए तो कहीं मटकी फोड़ने की मस्ती में बच्चों की टोलियां उत्साह से झूमती दिखाई दीं। ऐसा लगा मानो हर आंगन में नंदलाल ने बाल रूप में दस्तक दे दी हो।
इस बार नंद उत्सव का सबसे प्यारा रंग नन्हे बच्चों के कान्हा और राधा बनने में देखने को मिला। कोई मोर मुकुट, पीतांबर और हाथ में बांसुरी लेकर कान्हा बना तो कोई मटकी और माखन के साथ नटखट नंदलाल के रूप में नजर आया। किसी के चेहरे पर कान्हा की शरारत थी तो किसी की मुस्कान में बाल कृष्ण की मासूमियत दिखाई दी। बच्चियों में भी राधा रानी बनने का खास उत्साह रहा। लाल चुनरी, लहंगा, आभूषण और माथे पर बिंदी लगाए नन्ही राधाएं जब इठलाती हुईं सामने आईं तो हर किसी के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
कहीं नन्हे कान्हा ने मटकी फोड़ी तो कहीं भजनों पर थिरके कदम
जन्माष्टमी और नंद उत्सव के दौरान बच्चों के लिए जगह-जगह मटकी फोड़ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी हुआ। नन्हे-मुन्ने कृष्ण बनकर मटकी तक पहुंचने की कोशिश करते नजर आए। बच्चों की टोलियों में मटकी फोड़ने को लेकर खूब उत्साह रहा। वहीं कृष्ण भजनों की धुन बजते ही बच्चे डांस करने लगे। कोई हाथ में बांसुरी लेकर कान्हा की तरह नाचा तो कोई राधा बनकर घूमर और नृत्य की अदाएं दिखाता नजर आया। बच्चों की इन मासूम अदाओं ने माहौल में अलग ही मिठास घोल दी।
कई घरों में भाई-बहन की जोड़ी ने राधा-कृष्ण का रूप धारण किया तो कहीं दोस्तों ने मिलकर पूरी कृष्ण मंडली सजा ली। किसी ने गोप का रूप धरा तो कोई गोपी बना। कुछ बच्चों ने छोटी-सी कृष्ण लीला प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। उनकी मासूम आवाज, नटखट अंदाज और भजनों पर थिरकते कदम उत्सव की सबसे खूबसूरत तस्वीर बन गए।
हर पोज में कान्हा, हर वीडियो में कृष्ण भक्ति
नन्हे कान्हा और राधा रानी के इन मनमोहक रूपों को कैमरे में कैद करने का भी खूब क्रेज दिखाई दिया। माता-पिता अपने बच्चों को कभी मुरली के साथ पोज करवाते तो कभी मटकी और माखन के साथ फोटो खिंचवाते नजर आए। कोई बच्चा कैमरे के सामने मुस्कुराता दिखा तो कोई आंखों में शरारत लिए नटखट अंदाज में पोज देता नजर आया। बच्चों की सेल्फी, डांस वीडियो और कृष्ण लीला के छोटे-छोटे वीडियो परिवार के मोबाइल और सोशल मीडिया पर छाए रहे।
कहीं नन्हा कान्हा मुरली बजाने का अभिनय करता दिखाई दिया तो कहीं राधा बनी बच्ची शर्माते हुए कैमरे के सामने खड़ी नजर आई। किसी तस्वीर में दो बच्चे राधा-कृष्ण की जोड़ी बने तो कहीं बच्चों की पूरी टोली ने कृष्ण भक्ति में रंग भर दिया। इन तस्वीरों में सिर्फ वेशभूषा नहीं, बल्कि बच्चों की मासूम खुशी और परिवारों की आस्था भी साफ दिखाई दी।
लड्डू गोपाल का भी सजा मनमोहक दरबार
घरों में लड्डू गोपाल का विशेष श्रृंगार भी किया गया। किसी घर में बाल गोपाल को फूलों से सजे झूले में विराजमान किया गया तो कहीं पालना, टोकरी और रंग-बिरंगी सजावट के बीच उनका सुंदर दरबार सजाया गया। नई पोशाक, मोर मुकुट, मोरपंख, बांसुरी और आभूषणों से सजे लड्डू गोपाल का रूप देखते ही बन रहा था। बच्चों ने भी उत्साह के साथ लड्डू गोपाल का श्रृंगार किया, उन्हें झूला झुलाया और भोग लगाया। कहीं माखन-मिश्री, पंचामृत और मिठाई का भोग लगाया गया तो कहीं घर में बने पकवानों से भगवान का भोग सजाया गया।
मंदिरों और गांवों में देर तक गूंजे कान्हा के जयकारे
गांवों में मंदिरों को फूलों, झालरों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया। जन्माष्टमी की रात भगवान कृष्ण के जन्म के समय मंदिरों में घंटियां और जयकारे गूंजे। इसके बाद नंद उत्सव में कृष्ण जन्म की खुशी का उल्लास देखने को मिला। मंदिरों और चौपालों पर भजन-कीर्तन, संकीर्तन और कृष्ण भक्ति के कार्यक्रम हुए। महिलाओं ने प्रसाद और भोग तैयार किए, जबकि बच्चों और युवाओं ने झांकियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में उत्साह से भाग लिया।
नंद उत्सव की इन झलकियों में सबसे खास रहा बच्चों का निष्कलंक उत्साह। किसी के सिर पर मोर मुकुट था, किसी के हाथ में मुरली, किसी के सामने मटकी-माखन और किसी के कदम कृष्ण भजनों की धुन पर थिरक रहे थे। कहीं राधा की मुस्कान थी तो कहीं कान्हा की नटखट अदाएं।
दरअसल, इस बार जन्माष्टमी और नंद उत्सव की तस्वीरें सिर्फ तस्वीरें नहीं रहीं, बल्कि परिवारों के लिए ऐसी प्यारी यादें बन गईं, जिन्हें मोबाइल कैमरों ने हमेशा के लिए संजो लिया। मुरली की तान, मटकी की मस्ती, नन्हे कदमों का नृत्य और लड्डू गोपाल की मुस्कान—हर तरफ कृष्ण ही कृष्ण नजर आए।











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