निकाय चुनाव में ‘खरीद-फरोख्त’ का खेल!

 निकाय चुनाव में ‘खरीद-फरोख्त’ का खेल! गहलोत बोले- पार्षदों को 2-2 करोड़ का प्रलोभन



भरतपुर से जोधपुर तक भाजपा को बहुमत नहीं, धनबल से बोर्ड बनाने का लगाया आरोप; बोले- ‘भाजपा नहीं, लक्ष्मी जी के मेयर-चेयरमैन बन रहे’

जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नगरीय निकाय चुनाव परिणामों के बाद भाजपा पर धनबल, सत्ता के दुरुपयोग और पार्षदों की कथित खरीद-फरोख्त के गंभीर आरोप लगाए हैं। गुरुवार को प्रेस वार्ता में गहलोत ने दावा किया कि कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों को डराने-धमकाने के साथ डेढ़ करोड़, दो करोड़ और ढाई करोड़ रुपए तक के प्रलोभन दिए जा रहे हैं।

गहलोत ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव के लिए समान अवसर जरूरी है, लेकिन प्रदेश में पुलिस और प्रशासन के कथित दुरुपयोग से पार्षदों पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अब निकाय स्तर तक वही खरीद-फरोख्त की राजनीति ले आई है, जिसके आरोप राष्ट्रीय स्तर पर भी लगते रहे हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के भरतपुर, केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी के अजमेर, भूपेंद्र यादव के अलवर, गजेंद्र सिंह शेखावत के जोधपुर, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के पाली और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गृह क्षेत्र झालावाड़ में भाजपा के बहुमत से दूर रहने का दावा किया।

गहलोत के मुताबिक प्रदेश के 10,244 वार्डों में भाजपा 6,065 वार्डों में चुनाव हार गई। 309 निकायों में से 223 में भाजपा को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। उन्होंने दावा किया कि 10 नगर निगमों में भाजपा को चार में बहुमत मिला।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि झुंझुनूं, नीमराना, टोंक, जोधपुर, कोटपूतली-बहरोड़, सीकर, धौलपुर, जालौर, अजमेर और बूंदी सहित कई क्षेत्रों में पार्षदों की बाड़ेबंदी पर दबिश और परिजनों पर दबाव बनाने की शिकायतें सामने आई हैं। खैरथल के पार्षद विक्रम चौधरी के भाजपा में शामिल होने को भी उन्होंने इसी अभियान से जोड़ते हुए आरोप लगाए।

गहलोत ने भाजपा पर परिसीमन में कथित हेरफेर का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जोधपुर में कांग्रेस को भाजपा से अधिक वोट मिलने के बावजूद दोनों को बराबर 44-44 सीटें मिलीं। जयपुर में भी कांग्रेस को अधिक वोट मिलने के बावजूद भाजपा को ज्यादा वार्ड मिलने का दावा उन्होंने किया।

उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपए खर्च कर यदि कोई मेयर या चेयरमैन बनता है तो वह जनता की सेवा के बजाय अपनी राजनीतिक ‘लागत’ वसूलने की कोशिश करेगा। गहलोत ने इसे लोकतंत्र और आम जनता के हितों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।

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